Thursday, July 16, 2009

शब्द्सुधा की सादर प्रस्तुति...............

अनुज अलबेला खत्री जी ने यह ब्लाग बना कर मुझे सौंप दिया और कहा कि दीदी अब तक आप ने इतने अनुभव समेटे हैं उन्हें लिख डालिए इस में. अपनी व्यस्तता के चलते , कई दिन इस तरफ ध्यान नहीं दे पाई. पर आखिर में अनुज की बात माननी पड़ी.

मित्रो ! इसे शुरू करने से पहले मैं अपने अग्रज 'हिन्दी चेतना' के मुख्य संपादक श्री श्याम त्रिपाठी जी को नमन करती हूँ, जिनका आशीर्वाद मेरी शक्ति है. वे मुझे भाई कहतें हैं. ओम व्यास ओम जी भी तो मुझे भाई कहते थे. कभी बहन नहीं कहा... फ़ोन पर बात शुरू करते ही कहते थे--सुधा भाई, क्या हाल है? भाई मुझे पता है, आप मुझे देख रहे हैं और आप की शुभ कामनाएँ मेरे साथ हैं.

मैं अपनी घनिष्ट सहेलिओं, वरिष्ट कवयित्री डॉ।अंजना संधीर, प्रतिष्ठित कथाकार इला प्रसाद के स्नेह के बिना इसे शुरू नहीं कर सकती जो हर दुःख सुख में मेरे साथ खड़ी रहती हैं। वरिष्ठ कवयित्री, कथाकार डॉ. सुदर्शन प्रियदर्शनी, प्रतिष्ठित कवयित्री रेखा मैत्र, शशि पाधा , राधा गुप्ता का सहयोग मेरी उर्जा है.

ई-कविता की त्रिमूर्ति (अनूप भार्गव, घनश्याम गुप्ता, राकेश खंडेलवाल) ने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया है. उन्हें नमन किये बिना मैं आगे नहीं बढ़ सकती.

रेडियो सबरंग के संचालक, निर्देशक, संरक्षक अपने भाई चाँद शुक्ला जी को इस ब्लाग को शुरू करने से पहले प्रणाम करती हूँ . उनका आशीर्वाद मेरे लिए बहुत महत्त्व रखता है.

यू. के के बड़े भाई गुरुवर प्राण शर्मा और आदरणीय महावीर जी( जिन्होंने अपने ब्लाग में हमेशा मुझे स्थान दिया) को कलम पकड़ने से पहले चरणवन्दना.

यू .के के वरिष्ठ, प्रतिष्ठित, चर्चित , सम्माननीय कथाकार तेजेन्द्र शर्मा जिनकी कहानियों ने मेरे जीवन को एक नया मोड़ दिया. उनकी आलोचना मेरी कहानियों को सुदृढ़ करने में सहायता करती है. जानती हूँ उनका आशीर्वाद मेरे साथ है.

प्रसिद्द, वरिष्ठ साहित्यकार, उपन्यासकार रूप सिंह चंदेल जी( जिन्होंने रचनासमय और वातायन -अपने ब्लाग्स में मुझे बहुत सम्मान दिया ) और सुभाष नीरव जी जो कवि , नामवर कथाकार एवं प्रतिष्ठित अनुवादक हैं और इनके कई ब्लाग्स हैं। साहित्य निधि को समृद्ध करने में इनका बहुत योगदान हैं. दोनों साहित्यकारों की शुभकामनायें लिए बिना कैसे कुछ लिखा जा सकता है?

साहित्य साधक मित्र, अनुज आत्माराम ( गर्भनाल - पत्रिका) का सहयोग प्रेरणा बन मेरी रचनात्मकता और मौलिकता को नए पंख देता रहता है.

सभी ब्लागरस का साथ और शुभ कामनाएँ चाहती हूँ. साहित्य -शिल्पी के राजीव रंजन प्रसाद तो हमेशा मुझे साहित्य शिल्पी में छापते हैं. आभारी हूँ.

अनुभूति, अभिव्यक्ति की पूर्णिमा वर्मन जी और साहित्य कुञ्ज के सुमन घई को दाद देती हूँ, जो इतने वर्षों से हिंदी साहित्य को नायाब हीरे जवाहरात दे रहे हैं.

अंत में दैनिक पंजाब केसरी के मुख्य संपादक श्री विजय चोपड़ा जी के आशीर्वाद ( जिनके मार्ग दर्शन से मैं एक स्पष्ट और निडर पत्रकार और लेखिका बनीं) और अपने परिवार के सभी सदस्य जिन्हें ईश्वर ने अपने सान्निध्य में ले लिया है, के आशीर्वाद के साथ अपनी मेल समाप्त करती हूँ।

इसे पढ़ने और अपना समय देने के लिए आभारी हूँ.

सुधा ओम ढींगरा


19 comments:

AlbelaKhatri.com said...

suswagtam................

Shashi said...

प्रिय सुधा,

आशीष और स्नेह के पुष्प भेजती हूँ
शुभ कामना की मीठी सुगन्ध भेजती हूँ
तेरी लेखनी के दीपक जलें चहुँ ओर
चाँद सूरज की झिलमिल किरण भेजती हूँ
सप्रेम,

शशि पाधा

रूपसिंह चन्देल said...

आदरणीया सुधा जी,

नये ब्लॉग के लिए बहुत बहुत बधाई. इसमें आपकी नयी-पुरानी रचनाएं प्रकाशित होकर पाठकों को लाभान्वित करेंगी यह आशा है. आशा है कि प्रतिदिन कुछ न कुछ इसमें प्राप्त होता रहेगा.

ढेर सारी शुभ कामनाओं के साथ,

विनीत-

रूपसिंह चन्देल

Atmaram Sharma said...

आदरणीय सुधा जी,

ब्लॉग जगत में इस नये तेवर और नये रूप में आपका स्वागत है. यूँ तो आप पहले से ही यहाँ मौजूद थीं. पहले मनमौजी ढंग था, अब उम्मीद की जा सकती है कि नियमित तौर पर आपका लिखा पढ़ने को मिलेगा. निदा फाज़ली की कविता स्मरण हो आई है, गौर करें -

लिखो कि
चील के पंजों में
साँप का सर है

लिखो कि
साँप का फन
छिपकली के ऊपर है

लिखो कि
मुँह में उसी छिपकली के
झींगुर है

लिखो कि
चेंवटा झींगुर की
दस्तरस में है

लिखो कि
जो भी यहाँ है किसी
क़फस (पिंजरा) में है

लिखो कि
रंग है जो भी नज़र में
कच्चा है

जो एक दर्द है साँसों में
वो ही सच्चा है

ये एक दर्द ही
संघर्ष भी है ख्वाब भी है
लिखो कि
ये ही अँधेरों का
माहताब भी है.

बहुत शुभकामनाएँ.

सादर
आत्माराम

जयप्रकाश मानस said...

आपको बधाई हमारी ओर से । http://jayprakashmanas.blogspot.com/2009/07/blog-post_16.html

आपके विचार के लिए रास्ता देख रहा है ।

cmpershad said...

बधाई कि आप अपना अमूल्य समय निकाल कर ब्लागर बन गई हैं। ब्लाग जगत में आपका स्वागत है- शुभकामनाएं।

आनंदकृष्ण said...

आदरणीय सुधा जी, आपका ब्लॉग देखा अच्छा लगा. आपके लेखन से नियमित रूप से रू-ब-रू होने में ये ब्लॉग काफी मददगार साबित होगा. मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें. ...... अत्यंत संकोचपूर्वक एक सुझाव देने का साहस कर रहा हूँ. ब्लॉग में पृष्ठभूमि गहरे लाल रंग की है और अक्षरों का रंग काला है. इस कारण से पढने में असुविधा हुई है. अतः यदि पृष्ठभूमि को हलके रंग की कर दी जाए तो अच्छा रहेगा.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी पधारें-
http://www.hindi-nikash.blogspot.com

सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर
mobile : 09425800818

pran said...

PRIY SUDHA JEE,
AAPKA NAYA BLOG! WAH,KYAA BAAT HAI!
DHERON BADHAAEEYAN.AB AAP SHABDON KEE SUDHAA
BARSAA HEE DEN.AAPSE BAHUT AASHAYEN HAIN.
ALBELA JEE KEE KALPANAA KHOOB HAI.
UNKO BHEE BADHAAEE.

haidabadi said...

सुधा दीदी साहिबा
आपका ब्लॉग देखा दिलकश और अलबेला सा लगा
दिल बाग़ बाग़ हो गया और तबियत बशिश्त हो गई
आपने मुझे सम्मान दे कर मेरा कद बुलंद कर दिया है
मुझे इल्फाज़ नहीं मिलते लेकिन फिर भी मैं अपने प्यार
का इज़हार इन शब्दों से कर रहा हूँ
मेरी दुआ है के तू खुश रहे आबाद रहे
तू तंदरुस्त दिखे और सेहतयाब रहे
सदा महकते रहें तेरी तमन्ना के गुलाब
तू इनको चाँद सितारों की छाँव मे रखना

चाँद शुक्ला हदियाबादी
डेनमार्क

महावीर said...

सुधा जी
ब्लॉग बहुत ही सुन्दर और आकर्षक है. हमारी ओर से अनेकानेक बधाइयाँ. वैसे तो आपकी रचनाएँ यत्र-तत्र फैली हुई हैं पर अब 'शब्दसुधा' पर सारी सामग्री पढ़ने का आनन्द कुछ और ही होगा. बस, रचनाओं की प्रतीक्षा है.
अलबेला जी को धन्यवाद दिए बिना तो बधाई अधूरी रहेगी. अलबेला जी आपकी इस कला को प्रणाम. हाँ, आपकी ग़ज़लों का भी जवाब नहीं.
महावीर

gurdial said...

शब्द सुधा को देखा मन में ख़ुशी हुई
सुधा जी आपको पंजाबी ब्लोग्स में तो देखा है और पढ़ा भी है
आपका हिंदी ब्लॉग देखा अब आपको हिंदी में भी पढने का मौका
मिलेगा और पंजाब की सोंधी सोंधी खुशबू हिन्दी को भी नसीब होगी
पंजाब की बेटी को मेरा सलाम
गुरदयाल सिंह रमता
प्रधान विश्व पंजाबी सभियाचारक मंच
डेनमार्क

अनूप भार्गव said...

सुधा जी:
आप का इस ब्लौग की दुनिया में स्वागत है । खुशी है कि अब आप को पढने का एक और नया माध्यम मिल रहा है । मुझे ब्लौग पर पढने में अधिक मज़ा आता है क्यों कि यहां मैं अपनी सुविधा के अनुसार जब चाहे पढ़ सकता हूँ ।

स्नेह और शुभ कामनाओं के साथ ..

अनूप भार्गव

तेजेन्द्र शर्मा said...

Sudha ji

Aaj aap ka blog dekha hai. Ye ek sukhad khabar hai. HalaaNki jaanta hoon ki aap pehley hee bahut vyast rehti hain. Adhiktar doosroN kee dikkatein duur karney mein hee aap ka samay beet jaata hai. Uss par Hindi Chetna ke ank aur visheshank! Phir aap ki apni rachnasheelta bhee samay maangti hai.

Meri kaamna hai ki aap apney blog ke liye bhee samay nikaal sakein aur aahista aahista apna sahitya yahan pesh karna shuru karein. Aap har magazine evam website par chhapein; lekin uss key baad apni tamaam rachnaon ko iss blog par bhee post karti rahein. Yeh blog aap kay sahitya kee reference book ban sakta hai.

Bus sahitya sewa yun hee karti rahein.

tejendra sharma
general secretary - Katha (UK)
London

सुभाष नीरव said...

आदरणीय सुधा जी।
पहले तो बहुत बहुत बधाई। देर से टिप्पणी इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि पिछले चार पाँच दिनों से नेट नहीं चल रहा था। आज ही ठीक हुआ। मेरा तो मानना है कि हमें समय के साथ साथ चलना सीखना चाहिए। यह अभिव्यक्ति की नई तकनीक है जो सहज सुलभ है। बस, थोड़ा सा समय, थोड़ी सी जानकारी और थोड़ी सी लगन चाहिए, इसी से काम चल जाएगा। हम लेखकों को तो इससे जुड़ना ही चाहिए। आपकी रचनाएं तो इधर उधर पढ़ने को मिलती ही रहती हैं, अब आपके अपने ब्लॉग पर भी सहजता से उपलब्ध हो जाया करेंगी। मेरी शुभकामनाएं! हाँ, ब्लॉग के रंग बहुत चटख हैं, जो चुभते हैं। पृष्ठभूमि में रंग हल्का हो तो अधिक अच्छा रहेगा और ब्लॉग पर आपकी तस्वीर अलग से हो,तो भी ब्लॉग और सुन्दर लगेगा।
आपका
सुभाष नीरव

AlbelaKhatri.com said...

अलबेला खत्री जी,
सादर नमस्कर!
आप जो भी काम करते हैं, वह दिल से और लगन से करते हैं. आपने जो नया ब्लॉग सुधा बहन के लिए प्रस्तुत किया है वह अपने आप में एक ताजमहल है .
देखकर ऐसा लगता है कि आपने इसे कविता का रूप दे दिया है, या किसी की ग़ज़ल को चित्रित कर दिया है . स्वप्न और सत्य में कोई अन्तर नहीं रह गया.
आपके काम और मेरी बहना की नज़र उतरता हूँ. ह्रदय से मेरी बधाई स्वीकार करें .
श्याम त्रिपाठी,
मुख्य सम्पादक,
हिन्दी चेतना(त्रैमासिक)


abhi abhi yah sandesh padha...........
yon laga maano kisi ne sneh se peeth thapthapa di ho

AADARNEEY SHYAM TRIPAATHIJI,
NAMASKAAR.

AAPKE IS SNEHSIKT SANDESH KO MAIN SAHARSH SWEEKAR KARTA HOON AUR EK BAAT AAPKE BAHAANE SAMOOCHE HINDI JAGAT KO BATANA CHAHTA HOON KI 'SHABDSUDHA' BANAATE SAMAY SACHMUCH MERE MAN ME YAHI KHYAAL THA JAISE MAIN KOI TAJ MAHAL BANA DOON.........YA AISEE GHAZAL UKER DOON JO SUDHA DIDI KO BHEETAR TAK AANAND AUR UTSAAH SE SARAABOR KAR DE .....AGAR IS PRYAAS ME MAIN SAFAL HUA HOON TOH MUJHSE ZYADA BHAGYASHAALI AUR KAUN ?

SUDHAJI K LIYE KUCHH KARNA MERA APNE AAP K LIYE HI KARNA HAI KYONKI UNHONNE MERE LIYE ITNA KUCHH KIYA HAI JITNA SHAAYAD MAIN SVYAM BHI NAHIN KAR PAATA ....
YAH BLOG ADHIKAADHIK LOGON TAK PAHUNCHE AUR BLOG-JAGAT ME YASH TATHAA ATHAH KIRTI PRAPT KARE YE MERI HAARDIK SHUBH KAMNA HAI

AAPKE SNEH K LIYE EK BAR PUNAH: SAADHUVAAD,

SADAIV VINAMRA,
albela khatri
www.albelakhatri.com
www.hasyahungama.com
www.albelakhari.blogspot.com

Udan Tashtari said...

ब्लॉगजगत में आपका हार्दिक स्वागत है.

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